गर्मी के दिनों में लहसुन की खेती कर बने करोड़पति |

लहसुन की खेती करने की प्रक्रिया निम्न है:

भूमि तैयारी:

  1. लहसुन के लिए हल्की, उपजाऊ और अच्छी नकदी वाली मिट्टी उपयुक्त होती है।
  2. खेत को अच्छी तरह से जुताई और फर्टिलाइज़र (खाद) डालकर तैयार किया जाता है।
  3. लहसुन की खेती के लिए मिट्टी का पी.एच. मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए।

बीज की तैयारी:

  1. लहसुन के बड़े और स्वस्थ कलियों को ही बीज के रूप में उपयोग किया जाता है।
  2. इन्हें अलग-अलग गांठों में विभाजित किया जाता है।
  3. बीज को कवककनाशक दवा से उपचारित किया जाता है।

रोपाई:

  1. लहसुन की कलियों को लगभग 6-8 इंच की दूरी पर और 2-3 इंच की गहराई में रोप दिया जाता है।
  2. रोपाई का समय अक्टूबर से नवंबर के बीच होता है।
  3. लहसुन की कलियों को लाइनों में रोपा जाता है।

सिंचाई:

  1. लगातार सिंचाई की आवश्यकता होती है, विशेष रूप से पौधे की वृद्धि की अवस्था में।
  2. सिंचाई की अधिक आवश्यकता होने पर स्प्रिंकलर या ट्रिप सिंचाई की जाती है।

खरपतवार नियंत्रण:

  1. लहसुन की खेती में खरपतवारों के नियंत्रण के लिए नियमित निराई की जरूरत होती है।
  2. यदि आवश्यक हो तो खरपतवार नाशक दवाओं का भी उपयोग किया जा सकता है।

कीट और रोग नियंत्रण:

  1. लहसुन की फसल को कई कीटों और रोगों से बचाने की आवश्यकता होती है।
  2. इसके लिए कीटनाशक और कवककनाशक दवाओं का समय-समय पर छिड़काव किया जाता है।

फसल कटाई:

  1. लहसुन तैयार होने में लगभग 7-8 महीने का समय लगता है।
  2. जब बीज-भागों के ऊपर का हिस्सा सूख जाता है, तो फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है।
  3. फसल को जड़ों सहित उखाड़ लिया जाता है, धूप में सुखाया जाता है और फिर भंडारित किया जाता है।

इस प्रकार लहसुन की सफल खेती के लिए उपरोक्त चरणों का पालन करना आवश्यक होता है। इसके अलावा किसानों को समय-समय पर विशेषज्ञों की सलाह लेनी चाहिए।

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लहसुन की खेती से आर्थिक लाभ निम्नलिखित हैं:

लाभ के क्षेत्र विवरण
उच्च मांग लहसुन की मांग बाजार में लगातार बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छा मूल्य मिलता है।
उच्च उपज प्रति हेक्टेयर लहसुन की उपज 6-10 टन तक हो सकती है, जो किसानों को अच्छा लाभ देती है।
आसान भंडारण लहसुन को लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है, जिससे किसान उच्च मूल्य पर बेच सकते हैं।
निर्यात संभावनाएं लहसुन का निर्यात विदेशी मुद्रा अर्जित करने का एक अच्छा स्रोत है।
रोजगार सृजन लहसुन की खेती और प्रसंस्करण से लोगों को रोजगार मिलता है।
कम लागत लहसुन की खेती की लागत अन्य फसलों की तुलना में कम होती है।
गहन खेती लहसुन की खेती छोटे क्षेत्रों में भी की जा सकती है, जिससे किसानों को अधिक आय मिलती है।

 लहसुन की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी गतिविधि है, जो उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार करती है।

लहसुन की खेती करने के मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं:

फायदे विवरण
उच्च उपज लहसुन उच्च उपज देने वाली फसल है। प्रति हेक्टेयर 6-10 टन उपज मिल सकती है।
बेहतर मूल्य प्राप्ति बाजार में लहसुन की मांग अच्छी रहने के कारण किसान अच्छे मूल्य पर अपना उत्पाद बेच सकते हैं।
लागत कम लहसुन की खेती की लागत अन्य फसलों की तुलना में कम होती है।
भंडारण योग्य लहसुन को लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है, जिससे किसान उच्चतम मूल्य पर बेच सकते हैं।
निर्यात संभावनाएं लहसुन का निर्यात विदेशी मुद्रा अर्जित करने का अच्छा स्रोत है।
गहन खेती लहसुन की गहन खेती छोटे क्षेत्रों में भी की जा सकती है।
बेहतर जलवायु अनुकूलन लहसुन कई प्रकार के जलवायु में उगाया जा सकता है।
रोजगार सृजन लहसुन की खेती और प्रसंस्करण से अनेक लोगों को रोजगार मिलता है।

इस प्रकार, लहसुन की खेती एक लाभकारी गतिविधि है जो किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करती है।

लहसुन की खेती के बारे में FAQs:

1. लहसुन की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी कौन सी होती है?
उत्तर: लहसुन की खेती के लिए हल्की, उपजाऊ और अच्छी नकदी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का पी.एच. मान 6.0 से 7.0 के बीच होना चाहिए।

2. लहसुन की रोपाई कब की जाती है?
उत्तर: लहसुन की रोपाई सामान्यतः अक्टूबर-नवंबर के महीनों में की जाती है। रोपाई का समय क्षेत्र और जलवायु पर निर्भर करता है।

3. लहसुन की सिंचाई कितनी बार और कब की जाती है?
उत्तर: लहसुन की सिंचाई की आवश्यकता 7-10 दिनों के अंतराल पर होती है। फल बनने की अवस्था में सिंचाई की मात्रा बढ़ा दी जाती है।

4. लहसुन की फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?
उत्तर: लहसुन की फसल तैयार होने में लगभग 120-150 दिन का समय लगता है। यह जलवायु और किस्म पर भी निर्भर करता है।

5. लहसुन की प्रमुख किस्में कौन सी हैं?
उत्तर: लहसुन की प्रमुख किस्में हैं – मेरुठ सफेद, जयपुर लहसुन, आगरा लोकल, गंगा सफेद, और गुजरात लहसुन।

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